उत्तर प्रदेश के सैकड़ों सरकारी इंटर कॉलेजों में बुनियादी विज्ञान प्रयोगशालाओं का अभाव छात्रों के व्यवहारिक ज्ञान पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। विज्ञान जैसे विषयों में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रयोगशालाओं में वास्तविक प्रयोग करके समझ बढ़ाना अनिवार्य होता है। लेकिन प्रदेश की शैक्षिक व्यवस्था की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है।
प्रयोगशालाओं की कमी से बाधित हो रही है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुल 1172 राजकीय इंटर कॉलेजों में से 457 स्कूलों में भौतिक विज्ञान की प्रयोगशाला नहीं है। वहीं 453 स्कूलों में रसायन विज्ञान और 493 संस्थानों में जीवविज्ञान की प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब है कि आधे से अधिक स्कूलों में छात्र प्रयोगात्मक शिक्षा से वंचित हैं।

ICT लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम्स का भी अभाव
प्रयागराज ज़िले की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहाँ कुल 2841 माध्यमिक और इंटर कॉलेज हैं, जिनमें से 2006 स्कूलों में आईसीटी (ICT) लैब नहीं है। इसके अलावा 2087 स्कूल ऐसे हैं जहाँ स्मार्ट क्लासरूम्स की व्यवस्था भी नहीं है। डिजिटल इंडिया के युग में यह एक गंभीर शिक्षा-विकास की बाधा है।
केंद्र और राज्य सरकार की योजना और वास्तविकता में अंतर
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विज्ञान विषयों के लिए सुविधाएं बेहतर करने की योजना बनाई गई है। इसके अंतर्गत राज्य सरकारों को सुझाव दिया गया है कि जिन स्कूलों में ये सुविधाएं नहीं हैं, उनका आकलन कर रिपोर्ट तैयार करें। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे इन स्कूलों को मदद दी जा सकती है।
लेकिन अभी तक जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बताते हैं कि नीतियों के क्रियान्वयन में भारी कमी है। प्रयोगशालाओं के अभाव में विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रहना पड़ता है, जिससे उनके सीखने की गुणवत्ता घटती है।
प्रयोगशालाओं का महत्व और समाधान की दिशा
आज के समय में STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) शिक्षा का महत्व बढ़ रहा है। विज्ञान में रुचि और समझ तभी विकसित हो सकती है जब विद्यार्थी अपने हाथों से प्रयोग करके देख सकें। इसके लिए भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान प्रयोगशालाएं अनिवार्य हैं। साथ ही, ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम्स छात्रों को डिजिटल दुनिया से जोड़ते हैं, जिससे उनका सीखना ज्यादा प्रभावी और इंटरेक्टिव बनता है।
समाधान के रूप में, सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक स्कूल में प्रयोगशालाएं और डिजिटल शिक्षण संसाधनों की स्थापना सुनिश्चित करे। साथ ही इन प्रयोगशालाओं को योग्य स्टाफ और आवश्यक सामग्री से भी सुसज्जित किया जाए।
निष्कर्ष
राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रयोगशालाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक गंभीर शैक्षिक संकट की ओर इशारा करती है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा और करियर पर विपरीत असर डालेगा। सरकार को चाहिए कि वह रिपोर्ट्स के आधार पर प्राथमिकता से स्कूलों की स्थिति में सुधार लाए ताकि हर विद्यार्थी को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
