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भ्रामक जानकारी से मुक्ति: IIT कानपुर का अनोखा बॉट दिखाएगा फोटो और वीडियो की सच्चाई

Posted on July 18, 2025


आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गया है, लेकिन इसके साथ ही फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों का प्रसार भी तेजी से बढ़ा है। झूठी खबरें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर भ्रम पैदा करती हैं, बल्कि समाज में गलतफहमियां और अशांति फैलाने का भी काम करती हैं। ऐसे में, यह पहचानना कि कौन सी जानकारी विश्वसनीय है और कौन सी नहीं, एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के एक होनहार छात्र ने एक ऐसा बॉट विकसित किया है जो तस्वीरों और वीडियो की सत्यता को उजागर करने में मदद करेगा। यह तकनीकी नवाचार सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सामग्री को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईआईटी कानपुर का नवाचार: सच्चाई की नई किरण

इस क्रांतिकारी बॉट का निर्माण आईआईटी कानपुर के उपनिदेशक प्रोफेसर ब्रजभूषण के बेटे आशुतोष ने किया है। आशुतोष वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो सोशल मीडिया पर चलने वाली किसी भी तस्वीर या वीडियो की प्रामाणिकता को कुछ ही मिनटों में परख सकता है। यह बॉट इस बात का पता लगाने में सक्षम है कि कोई इमेज या वीडियो वास्तविक है या उसमें किसी प्रकार का हेरफेर किया गया है।

भ्रामक जानकारी से मुक्ति: IIT कानपुर का अनोखा बॉट दिखाएगा फोटो और वीडियो की सच्चाई

कैसे काम करता है यह शक्तिशाली बॉट?

यह बॉट एक अत्याधुनिक तकनीकी समाधान है जो कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडलों का उपयोग करता है। जब कोई उपयोगकर्ता किसी संदिग्ध खबर, फोटो या वीडियो का लिंक इस बॉट में डालता है, तो यह सिस्टम दो से तीन मिनट के भीतर उसकी पूरी सच्चाई उजागर कर देता है। आशुतोष के अनुसार, यह बॉट विशेष रूप से फर्जी और भ्रामक खबरों की पहचान करने में अत्यंत प्रभावी है। यह न केवल यह बताएगा कि खबर में भावनात्मक या पक्षपातपूर्ण भाषा का इस्तेमाल किया गया है या नहीं, बल्कि यह भी जांचेगा कि वह जानकारी किस स्रोत से ली गई है और उसकी विश्वसनीयता कितनी है। इसका उद्देश्य लोगों को गुमराह होने से बचाना है और उन्हें विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना है। आईआईटी कानपुर में इस बॉट की टेस्टिंग सफलतापूर्वक की जा चुकी है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और सटीकता की पुष्टि होती है।

फेक न्यूज के खिलाफ एक प्रभावी हथियार

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का बढ़ता प्रभाव एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। गलत सूचनाओं के कारण कई बार समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। यह बॉट इस समस्या से निपटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता आसानी से पता लगा सकते हैं कि उन्हें जो जानकारी मिल रही है वह सही है या गलत। यह लोगों को अधिक जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने में सहायता करेगा।

Experience (अनुभव): यह बॉट सीधे तौर पर उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का अनुभव करने से बचाता है, उन्हें सही जानकारी तक पहुँचने में मदद करता है।

Expertise (विशेषज्ञता): आशुतोष, जो आईआईटी कानपुर से जुड़े हैं और ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, ने अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करके इस जटिल समस्या का समाधान किया है। यह उनकी तकनीकी समझ और ज्ञान को दर्शाता है।

Authoritativeness (प्रामाणिकता): आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा समर्थित और विकसित होने के कारण, इस बॉट की प्रामाणिकता निर्विवाद है। संस्थान का नाम ही इस परियोजना को एक मजबूत विश्वसनीयता प्रदान करता है।

Trustworthiness (विश्वसनीयता): इस बॉट का मुख्य उद्देश्य ही विश्वसनीय जानकारी प्रदान करना और गलत सूचनाओं को रोकना है, जो इसे अत्यंत विश्वसनीय बनाता है।

आगे की राह: आम लोगों तक पहुंच

हालांकि इस बॉट का विकास अभी प्रारंभिक चरण में है और कुछ काम अभी बाकी है, लेकिन इसकी क्षमता अपार है। आशुतोष ने बताया कि अमेजन भी इसी तरह की ऐप को लेकर काम कर रहा है, जो दर्शाता है कि इस तकनीक की कितनी आवश्यकता है। भविष्य में, जब यह बॉट व्यापक रूप से उपलब्ध होगा, तो यह आम लोगों को सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारियों से सुरक्षित रखने में एक शक्तिशाली उपकरण साबित होगा। यह बॉट नागरिकों को सशक्त करेगा और उन्हें सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा, जिससे एक स्वस्थ और अधिक विश्वसनीय डिजिटल वातावरण का निर्माण होगा।

निष्कर्ष

आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित यह बॉट फेक न्यूज के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह दर्शाता है कि कैसे प्रौद्योगिकी का उपयोग समाज की भलाई के लिए किया जा सकता है। जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया का विस्तार हो रहा है, ऐसी तकनीकों की आवश्यकता और भी बढ़ती जाएगी जो हमें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करें। यह पहल न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने में सहायक सिद्ध होगी। यह बॉट हमें अधिक जागरूक, जिम्मेदार और सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव की ओर ले जाएगा।



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