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एक लाख से अधिक विद्यालयों में निपुण आकलन, एआरपी चयन में पिछड़े जिले

Posted on January 23, 2026


 एक लाख से अधिक विद्यालयों में निपुण आकलन, एआरपी चयन में पिछड़े जिले

प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता जांचने के लिए 27 जनवरी से 14 फरवरी के बीच 1,11,372 परिषदीय विद्यालयों में निपुण आकलन कराया जाएगा। इसमें 15,229 डीएलएड प्रशिक्षु लगाए जाएंगे और पूरा आकलन निपुण लक्ष्य एप के माध्यम से किया जाएगा। इसका दायरा बालवाटिका से कक्षा दो तक के सभी छात्र-छात्राओं को शामिल करते हुए भाषा और गणित की बुनियादी दक्षता पर केंद्रित होगा।

निपुण भारत मिशन की तैयारियों और प्रगति को लेकर गुरुवार को अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये समीक्षा बैठक की। इसमें निपुण विद्यालय आकलन, पिछले तीन महीनों में खंड शिक्षा अधिकारियों व प्रधानाध्यापकों के बीच हुई बैठकों, जनपद स्तरीय टास्क फोर्स की स्थिति, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत कराई गई एक्सपोजर विजिट और ईको क्लब फार मिशन लाइफ से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कई जिलों में अपेक्षाकृत

धीमी प्रगति पर अपर मुख्य सचिव ने नाराजगी भी जताई। कई जिले अब भी एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) के चयन में सुस्त हैं। एआरपी वे शिक्षक होते हैं जो अन्य विद्यालयों में जाकर शिक्षण विधियों, शैक्षिक सामग्री के प्रभावी उपयोग और सरकारी योजनाओं की प्रगति में सहयोग करते हैं। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि तय समय-सीमा में कार्य पूरे किए जाएं। ईको क्लब गठन में भी पिछड़े कई जिले कक्षा एक से 12 तक के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त, कस्तूरबा

गांधी बालिका विद्यालय, परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में इको क्लब फार मिशन लाइफ का गठन होना है। इसके लिए 31 जनवरी तक का लक्ष्य तय किया गया है। गठन के बाद ईको क्लब का नोटिफिकेशन प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करना है। इसमें गौतमबुद्धनगर, औरैया, मुजफ्फरनगर, गोंडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, कानपुर नगर, आगरा, मैनपुरी और इटावा पीछे चल रहे हैं। कल शिक्षकों से सीधा संवाद : निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षकों से सीधा संवाद करने के लिए 24 जनवरी आनलाइन गोष्ठी (यू-ट्यूब सेशन) का आयोजन किया जा रहा है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी का उद्देश्य निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन, कक्षावार और विषयवार अपेक्षित दक्षताओं की प्राप्ति व शिक्षकों के निरंतर क्षमता संवर्द्धन को और सुदृढ़ करना है। इसमें सभी डायट प्राचार्य, एडी बेसिक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, प्रधानाध्यापक, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, शिक्षक संकुल आदि की भागीदारी अनिवार्य की गई है।

एआरपी चयन में पिछड़े जिले

मथुरा, हरदोई, कासगंज, मऊ, गोंडा, मेरठ, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर और हमीरपुर जैसे जिले एआरपी चयन में पीछे चल रहे है। इन जिलों को 10 फरवरी तक शत-प्रतिशत एआरपी चयन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक लाख से अधिक विद्यालयों में निपुण आकलन, एआरपी चयन में पिछड़े जिले
2026-01-23T07:58:00+05:30
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